नमस्कार!   रचनाएँ जमा करने के लिए Login करें साझं ढले · हिन्दी लेखक डॉट कॉम
Aug 12, 2017
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साझं ढले

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लगता जब साझं ढले
फागुनी सी बयार चले
सांझ गुलाबी छाया तले
हम और तुम मिल जाएंगे
जैसे सुर और ताल मिले
मैं एक सुंदर गीत बनी
साज तुम मेरे बन जाते
देखा मैंने एक सपना
तुम इन्द्र बने घूम रहे
इंद्रधनुष की रेखाएं आकर
मेरा रूप श्रंगार रचे
सितारों को जमीं पर ले आएं
सुंदर ख्वाबों के तले

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Article Categories:
कहानी

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