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Nov 30, 2017
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साथी बढ़ते जाना

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साथी बढ़ते जाना
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राहों की बाधाओं से न घबराना |
मंजिल तक साथी बढ़ते जाना ||

धीरे धीरे तुम चलते रहना
बढा़ कदम पीछे न रखना
दृढ़ता अपने मन में पैठाना ||

रगड़ प्रस्तरों से पैर छिलेंगे
कभी आनचाहे काँटे भी चुभेंगे
उन काँटों को तुम फूल बनाना ||

होंगी न सारी अनुकूल हवाएँ
होंगी न पर प्रतिकूल सदाएँ
दोनों में तुम सामंजस्य बिठाना ||

 

राही चाहे कोई मिले या न मिले
भले छाँव रहे याकी धूप खिले
बस मंजिल ही वो बने ठिकाना ||

कर्म धर्म सेवा की लौ साथ लेना
हासपरिहास पे ध्यान न देना
दमखम से हर बाँध ढहाना ||

सतत कर्म से ही विजय मिले
होगी मंजिल तभी कदमों तले
शिवम् तुम्हे है इतिहास बनाना ||

✍–सुनील वाजपेयी “शिवम ”
तिलोकपुर हैदरगढ़ बाराबंकी उत्तर प्रदेश

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Article Categories:
गीत-ग़ज़ल

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