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Sep 1, 2017
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सिर्फ तुम (ग़ज़ल)

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हमारी कलम ने रचा जिसे वोह शाहकार हो तुम,

हो कोई ताज़ा शेर ,या हमारी हसीं ग़ज़ल हो तुम|

हमने जिसको देख कर जब कभी संवारा /सजाया ,

वोह हकीक़त बयाँ  करता आईना  बने हो  तुम|

हम जब भी जिंदगी की अँधेरी राहों में लडखडाये ,

हमें सहारा देने को हमारे लिए चिराग बने तुम|

इंसानी रिश्तों से रुसवा -ओ-  बेज़ार हुए जब भी ,

तो कभी अपनेपन सा एहसास लिए पुकार बने तुम |

हमारी हर राह गुज़रती है तेरे राहों से होते  हुए,

यकीं मानो ! हमारे हमदम,दोस्त, हमराज़ हो सिर्फतुम |

 

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गीत-ग़ज़ल

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि। प्रकाशित रचनाएं - महाविद्यालयीन पत्र -पत्रिकाएं , स्थानिय पत्र -पत्रिकाएं ( नवभारत - टाइम्स , नवभारत , नयी-दुनिया, हिंदुस्तान टाइम्स ,पंजाब- केसरी , आज का आनंद , दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, ) इंटरनेट हिंदी पत्रिकाएं , आदि में प्रकाशित हुई मेरी रचनाये (ग़ज़ल,कवितायेँ ) व् आकाशवाणी इंदौर, जोधपुर व् बीकानेर से प्रसारित ग़ज़ल व् कवितायेँ, संयुक्त काव्य-संकलन के तहत पर्यावरण प्रहरी , शब्द –प्रवाह नामक पुस्तक में मेरी रचनाएँ प्रकाशित हुई . सम्मान -- ग्रीन केयर सोसाइटी ,मेरठ द्वारा ''पर्यावरण -प्रहरी'' सम्मान। सम्प्रति --इंटरनेट के द्वारा ब्लॉग -लेखन , फेसबुक ,लिंकेडिन आदि में कविता-ग़ज़ल,कहानी -लेखन का कार्य तथा नवभारत टाइम्स और दैनिक जागरण हेतु लेखन –कार्य . ब्लॉग -- हिंदी काव्य संकलन , मंथन (विचार-विनिमय ) जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण ) चेतना -- कविता ,ग़ज़ल व् कहानियों को संकलन . पता -- ओनिका सेतिया ‘’अनु’’ मोब’ न. ९८७३४५७२६२ ३ इ /४८ ,एन, आई ,टी , फरीदाबाद (हरियाणा )

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