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Oct 7, 2017
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हकीक़त (ग़ज़ल )

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आना-जाना  जिंदगी का अपनी ख़ुशी से कब होता है?

क़ज़ा जब भी आये ख़ामोशी से साथ चलना पडता है.

खाली हाथ आये थे दुनिया में ,खाली हाथ ही जाना है,

एशो-इशरत ,औ दौलत सब यहीं छोड़ जाना पड़ता है.

जिस जिस्म पर  गुरुर किया ,अपना जिसे समझ बैठे ,

सांस निकल जाए तो इसे  ज़मींदोज़ होना ही पड़ता है.

क्या रहबर ,क्या  रफीक ,हमसफ़र हो  या रकीब ,दोस्तों !

कौन बचा है अब तक ?,बुलावा आये तो जाना ही पड़ता है.

यह दुनिया हकीक़त है ,जिंदगी भी हकीक़त है माना ,मगर !

सबसे बड़ी हकीक़त है मौत ,जिसके आगे सर झुकाना पडता है.

 

 

 

 

 

 

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गीत-ग़ज़ल

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि। प्रकाशित रचनाएं - महाविद्यालयीन पत्र -पत्रिकाएं , स्थानिय पत्र -पत्रिकाएं ( नवभारत - टाइम्स , नवभारत , नयी-दुनिया, हिंदुस्तान टाइम्स ,पंजाब- केसरी , आज का आनंद , दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, ) इंटरनेट हिंदी पत्रिकाएं , आदि में प्रकाशित हुई मेरी रचनाये (ग़ज़ल,कवितायेँ ) व् आकाशवाणी इंदौर, जोधपुर व् बीकानेर से प्रसारित ग़ज़ल व् कवितायेँ, संयुक्त काव्य-संकलन के तहत पर्यावरण प्रहरी , शब्द –प्रवाह नामक पुस्तक में मेरी रचनाएँ प्रकाशित हुई . सम्मान -- ग्रीन केयर सोसाइटी ,मेरठ द्वारा ''पर्यावरण -प्रहरी'' सम्मान। सम्प्रति --इंटरनेट के द्वारा ब्लॉग -लेखन , फेसबुक ,लिंकेडिन आदि में कविता-ग़ज़ल,कहानी -लेखन का कार्य तथा नवभारत टाइम्स और दैनिक जागरण हेतु लेखन –कार्य . ब्लॉग -- हिंदी काव्य संकलन , मंथन (विचार-विनिमय ) जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण ) चेतना -- कविता ,ग़ज़ल व् कहानियों को संकलन . पता -- ओनिका सेतिया ‘’अनु’’ मोब’ न. ९८७३४५७२६२ ३ इ /४८ ,एन, आई ,टी , फरीदाबाद (हरियाणा )

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