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Aug 17, 2017
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हम आजाद हैं ,

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मेरे भीतर मर गया ,पढा-लिखा इंसान ।
उस दिन से नेता सभी ,बाँट रहे हैं ज्ञान ।।

सहमा सोया आदमी,बहुत सहा अपमान ।
लेकिन फिर भी कह रहा,भारत यही महान ।।

पास कभी तो था नहीं,कौड़ी और छिदाम ।
आज उसी की कोठियां,भरे-भरे गोदाम ।।

ऐनक टूटा आँख का,कब सुन पाया कान ।
तेरा बन्दर बाप जी ,है चतुर बदजुबान ।।

आप लगाकर सोचते ,धूप- अगर-लोभान
मंदिर बज ले घण्टियाँ ,मस्जिद होय अजान

सुशील यादव

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Article Categories:
कहानी

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