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Aug 11, 2017
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हिंदी की उपमा

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💒💒💒भाषा की उपमा 💒💒💒

एक समय की बात है। हजारों साल पहले भारतवर्ष में दो नारियां थीं एक का नाम हिन्दी व दूसरी का नाम संस्कृत था उस समय इनका चलन था बड़ी बहन संस्कृत अद्वितीय खूबसूरत योग्य विद्वत्ता से परिपूर्ण थीं। दूसरी बहन हिन्दी भी सौंदर्य विद्वता से परिपूर्ण थीं।। दोनों बहनों में आपस में बहुत प्रेम था। परन्तु संस्कृत विद्वानों के साथ रहती थीं पंडितों तथा शास्त्रों में ज्यादा चलन था एवं हिंदी का आम लोगों में चलन था दोनों बहनों में बड़ा ही खूबसूरत माहौल था और दोनों ही भारतवासी की आन और शान थीं।। इसके बाद भारत में मुगलों का आगमन हुआ और धीरे-धीरे मुगलों ने अपना साम्राज्य स्थापित करना शुरू कर दिया। उनके साथ एक और बहन उर्दू का जन्म हुआ हिंदी और संस्कृत दोनों बहनों ने उर्दू कोअपना लिया और उनमें घुलमिल गयी तीनों बहनों में एक प्यार भरा रिश्ता हो गया।। हंसी-खुशी इज्जत के साथ दिन निकल रहे थे। पर यह ऊपर वाले को मंजूर नहीं था। और एक समय आया अंग्रेजों ने भारत में घुसपैठ शुरू कर दी। धीरे-धीरे अर्गेजों का अधित्पय होने लगा। सभी राजाओं और मुगलराज्यों को अपने अधीन कर लिया। उसी समय एक और बहन अंग्रेजी का आगमन हो गया चौथी बहन अंग्रेजी ने अपना अंग्रेजों व्दारा असर दिखाना शुरू कर दिया। तीनों बहनों ने खूब लड़ाई की परन्तु हारती ही चली गयीं। इसकी वजह अर्गेजों की राजनीति थी।। और आज भी ये बहनें लड़खड़ाती चल रही हैं। अपने घर में इन बहनों को मान सम्मान देने वाले कुछ लोग ही बचे परन्तु कुछ अभी भी हैं जो इज्जत करते हैं। और ऐसे भी हैं अधिकतर जो अब इन बहनों से शर्माते हैं। कैसा समय आ गया है आजकल सभी आने वाले कल को केवल अंग्रेजी ही सिखाना चाहते हैं हिन्दी बोलने वालों को गंवार अनपढ़ बेवकूफी की परिभाषा में रख दिया। अंग्रेजी बोलने वाले को धनवान सार्भान्त परिवार की परिभाषा दी जाने लगी।। और अंग्रेज़ी को मान सम्मान दिया जाने लगा और दूसरी भाषाएँ अपमानित होने लगी।। इस सब को देखकर दुख होता है अपने ही घर में बहनों का अपमान हो रहा है अब समय आ गया है old is gold ।।हम सभी इन बहनों का सम्मान वापस लातें हैं और अपने पुराने भारत को सम्मान दिलातें हैं ।।

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