हेप्पी न्यू इयर

By | 2017-12-31T20:06:24+00:00 December 31st, 2017|कविता|0 Comments

आज साथियों के संग न्यू इयर मनाऊगाँ

नाचूगा झूमूगा ओर गीत गाऊँगा।

ईर्ष्या ,अपराध ,ओर दोष छोड़कर

प्रीति रीति से सभी को हृदय लगाऊँगा ।

चिंगारियाँ जो जल रही है देश प्रेम की

देश हित में अपना तन मन लगाऊँगा ।

स्वच्छ भारती के जो सपने है बापू के

स्वच्छ देश करके हकीकत बनाऊँगा ।

हृदय में बहती संस्कार की लहर

मेरे देश को तबाह न कर सके कोई खबर

अपने खुदा से बस यही वरदान पाऊँगा।

प्रीति रीति से बड़ा न कोई है यहाँ

हिंदू नहीं मुस्लिम नहीं एक हे जहाँ

अपने हिंदुस्तान को उपवन बनाऊँगा ।

बनकर खड़ा मैं प्रहरी माँ भारती के तन का

कर्ज मैं चुकाऊ जो कर्ज हे वतन का

श़ृंगार में माँ भारती के मस्तिष्क चडाऊँगा ।

तिरछी नजर से मेरे देश को न देखिए

जलती चिताओं पर यों रोटी न सेंकिए

मेरे देश की कश्मीर है लाहौर मिलाऊँगा ।

कायरो सी हरकते अब करना छोड़ दो

पाक हो ,कर्म नापाक छोड़ दो

सुधरे नही जो अब भी,तो नक्शा मिटाऊँगा ।

खान खोल के सुनो ,मेरे देश के लीडर

राजनीति वोट की मत करो यहाँ

कारनामे जानती है यहाँ की सब प्रजा

खाल ओड शेर तो मत बनो यहाँ

गर विकास के कदम आगे न बढ़ सके

अब के चुनाव में याद नानी दिलाऊँगा।

राघव दुबे ‘रघु’

इटावा (उ०प्र०)

8439401034

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