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Dec 2, 2017
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फ़लसफ़ा

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फलसफा..

आँसू  आ के भी मेरी पलकों पे ही रह जाता है,
मैं थोड़ा अपनी जिंदगी कहता हूँ और वो रो जाता है.

हाथ  खाली  थे, हाथ खाली ही हैं अभी तक,
बिन  चिराग के कैसे देखो सबकुछ खो जाता है.

मेरी आँख रोना  भी चाहे तब भी हँस जाती है,
मैं हँस देता हूँ और उसे धोखा हो जाता है.

आज के फ़ूलॊ के पास बूँदें  हैं बारिश की,
हम जैसा भौंरा  उसे असली रस समझ जाता है.

धूप तपन तो दे सकती है पर जला नहीँ सकती,
खुद्दारी के आगे बड़े से बड़ा सूरज ठंडा  जाता है.

सारे के सारे ये तारे टूट कर गिरने ज़रूर हैं,
हर कोई हमसा नहीं होता जो लम्बा ठहर  जाता है.

भाग  कर मन्नू तूने ख्वाबों को पीछे छोड़ दिया,
अब बताओ जिंदगी के सफ़र में कहाँ थमा  जाता है.
मन्नू

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Article Categories:
गीत-ग़ज़ल

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