चलते-चलते थक से गए

चलते-चलते थक से गए
एक किनारे बैठे गए
जीवन के हरपल को हमने
हंस हंस कर ही गुजारे हैं
अश्क के अश्रु को हमने
फूलों के ओस बनाए हैं
उदासी का आलम पाया
महफिलें रंगीन बनाएं हैं
जीवन का सफर प्यारा है
दुख सुख आने जाने हैं
मर्जी के मालिक ईश्वर हैं
जो होना वह होना है
चलते चलते थक से गए
एक किनारे बैठ गए

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