अलख निरंजन अलख निरंजन

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अलख निरंजन अलख निरंजन

By |2017-09-02T06:20:45+00:00September 2nd, 2017|Categories: कविता|0 Comments

अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम
शहर में ज्ञानी बाबा आएं हैं
यूं तो कपड़े जोगिया पहने
लेकिन होते अति हैं मंहगे
अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम
एसी गाड़ी में चलते हैं
प्रभावशाली जीवन होता है
नौकर रक्षक इनके रहते
अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम
राजाओं से कम नहीं लगते
अति सुन्दर होती हैं नारी
जो इनकी सेवा करती हैं
अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम
इंद् बने घूमा करते
सबसे कहते मैं हूँ मालिक
दुनिया मुझसे ही चलती
अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम
काली करतूतें इनकी होती
एक बात कहूँ खरी खरी
इन पर न भरोसा करना
फिर न कहना ज्ञात नहीं था
अलख निरंजन अलख निरंजन
इन बाबाओं में कितना है दम

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