गांधारी

गांधारी आंखों में न बांधती पट्टी
शायद महाभारत कभी हुआ न होता
गांधारी ये तेरा कैसा पति धर्म था
जीवन पति आंखें बन जीया जो होता
गांधारी आंखों में न बांधती पट्टी
शायद कभी महाभारत हुआ न होता
दुर्योधन कभी दुष्ट हुआ न होता
भरी सभा में चीरहरण न होता
छल-कपट अनीति हुई न होती
गांधारी आंखों में न बांधती पट्टी
शायद कभी महाभारत हुआ न होता
पांडवों लाक्ष्यागृह जाना न होता
गांधारी कभी निरवंश न होती
क्रष्ण को श्राप दिया न होता
गांधारी आंखों में न बांधती पट्टी
शायद कभी महाभारत हुआ न होता
ये सच अब इस युग जीवन का
आंखों पर ममता की न बांधे पट्टी
उदेश्य प्रशस्त कर हर बालक का
गांधारी आंखों में न बांधती पट्टी
शायद कभी महाभारत हुआ न होता

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