हास्य कविता( चुटिया)

हास्य कविता (चुटिया)

आज शहर में शोर मचा है।
चुटिया कट डायन आयी है।।
लाल लाल सी आंखें उसकी।
हाथी जैसे दांत हैं निकले।।
बड़े बड़े नाखूनों वाली।
हमारे पड़ोस में रहती यौवना।।
सुना है उसकी चुटिया कट गई।
हमने अपनी चुटिया देखी।।
काली रेशम बालों वाली।
मुग्ध से चुटिया पर रहतें।।
उसे देख देख खुश होते रहते।
सुनते ही डर गए थे हम तो।।
पति के आगे हाथ जोड़कर।
करने लगे करुण विनती उनसे।।
दरबान घर के आगे खड़ा कर दो।
मुझको अपनी चुटिया है प्यारी।।
घर में हर बात मानी जाएगी।
बनेगा व्यंजन जो तुम चाहोगे।।
पत्नी से दासी बन जाएगी।
कभी न झगड़ा तुमसे करूगीं।।
राम कसम चाहे लेलो हमसे।
बस चुटिया की रक्षा है कर दो।।
चुटिया मेरी तुमको भी प्यारी।
चुटिया मेरी है बड़ी निराली।।

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