पढने भेजा लाल लौट कर आया नहीं।
स्कूल बस आते ही मां भागकर है देखती।।
सूनी सूजी अश्क से अपने लाल को देखती।
दिल मां का रो रहा व्यथा किससे जाके कहे।।

सौ रावणों सा इन्सान देखो कैसे हो गया।
कंस से भी कुत्सित इंसान निष्ठुर हो गया।।
वासना मानव में जाने कैसे घर कर गई।
दूषित मन कितना मानव मैला हो गया।।

बहन पछाड़ खा रही पिता सिसकते हुए।
रो रहा सारा जहां आज उस बच्चे के लिए।।
कौन दुख सम्भालें कौन ढाढ़स दे भला।
उस दुष्ट कानून दे फांसी की सजा।।

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