प्रगति

  • कविता 
    **** प्रगति के लिए **********
    “अंधकार” से बचना है !
    “सूर्य” की तेज किरणों को सहना है !
    हमें सागर पार जाना है !
    नव निर्माण करना है !
    आपस में “प्रेम” बढ़ाना है !
    “सन्नाटे” को “शांति” में बदलना है !
    “अधर्म” से “धर्म” को जितना है !
    “स्वर्ग” धरती पर ही बनाना है !
    “पाप” को समाप्त करना है !
    “पापी” को “पवित्र” करना है !
    हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई !
    कदम से कदम मिलाकर कर बढ़ना है !

* उदय श्री. ताम्हणे
शिवाजी नगर, भोपाल

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