गजल

गजल
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बात है, ‘लाजवाब’ समझा करो ………..
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वन है, ‘मूल्यवान’ समझा करो ।
बात है, ‘लाजवाब’ समझा करो ॥
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अब न काटेंगे वृक्ष, कर लो निश्चय ।
हर सड़क पर हो वृक्ष, समझा करो ॥
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वन्य प्राणी है, हमारे मित्र और साथी ।
वनों से मिलती हमे सांस समझा करो ॥
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वन मे रहते चिड़ा-चिड़िया, हिरण -हिरणी ।
वनो से है जीवन की आस, समझा करो ॥
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“वन” से है, मेरे /आपके दुनिया के ।
वंशज का ‘जीवन’ समझा करो॥
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“वन” को “वन” ही रहने दो, इन्सानो ।
के लिए “नगर” बने है, समझा करो ॥
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जल ही जीवन, वन ही जीवन ।
कह रहा ‘उदय श्री’ समझा करो ॥

* उदय श्री. ताम्हणे

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