में और मेरी ये बोतल

में और मेरी ये बोतल

By |2017-09-22T15:21:48+00:00September 22nd, 2017|Categories: बाल कथाएँ|Tags: , , |1 Comment

में और मेरी ये बोतल

पापा में नहीं पी सकती हूँ ना इस प्लास्टिक की बोतल से दुधु आपको मेरे फीलिंग समझनी चाइए में आपकी की बेटी हूँ आपको पता होना चाइए की मुझे क्या पसंद है क्या नहीं ये क्या पापा फिर मुझे गोदी में बैठा कर दुधु पिलाने की जिद में अड़े हो और में भी जब तक आपके मोबाइल में वो लकड़ी की काँठी न देख लू तब तक जुठ में ही मुँह को टेड़ा मेड़ा बना कर चली जाउंगी माँ के पास और फिर गिरा दूंगी आपकी सब्जियों की टोकरी अब मेरी तरफ क्यों देख रहे हो आपको पता है न में दिन में ४ बार देखता हूँ।

हे राम फिर से मुसीबत मेरे आगे पीछे क्यों घूम रहे हो पता है मेले को दही खानी है बस नहीं तो में मुँह टेड़ा कर दूंगी अले पापा आपको पता है हम दिन में चीजी खाते है पर मुझे नहीं पता क्या खाते है कभी मीठा तो कभी नमकीन टाइप होता है।
हे लाम फिर से मुसीबत मेरे आगे पीछे क्यों घूम रहे हो पता है मेले को दही खानी है बस नहीं तो में मुँह टेड़ा कर दूंगी अले पापा आपको पता है हम दिन में चीजी खाते है पर मुझे नहीं पता क्या खाते है कभी मीठा तो कभी नमकीन टाइप होता है।

पापा आपके लाये हुए सारे खिलोने में तोड़ दिए आपका छोटा भीम वाला खिलौना और ये आपकी चु मु करने वाले खिलोने मुझे अब और ढेर सारे खिलोने चाहिए और एक ो मोबाइल जिसपर में लकड़ी की देख सकूँ।

श्याम जोशी
वैदेही जोशी

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One Comment

  1. Aditi Rathi September 22, 2017 at 3:53 pm

    aayee…bottle…:* :*

    badi hoke boli papa me exact yai sochti thi…hehehe…

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