हा दुर्भाग्य ! (कविता)

हा ! दुर्भाग्य हा !

तू जिसको मिल जाये ,

उसे कभी ख़ुशी नहीं मिलती ,

चलता रहे चाहे जीवन भर ,

मगर मंजिल नहीं मिलती |

अरमान होते हैं बेशुमार ,

मगर पूरा करने की तामील नहीं होती |

सपने होते हैं आँखों में बेशक ,

उसके फेर में नींद भी सारी -सारी रात नहीं आती |

पंख तो  हैं ,मगर बेजान या टूटे हुए ,

उम्र का तकाजा ऐसा की उड़ने की हिम्मत नहीं होती|

गर उड़ना भी चाहे किसी तरह मगर

अपना आसमां कहाँ से लाये?

मिल भी जाये गर आसमां तो ,

जो  हमारी मंजिल तक हमें पहुंचाए ,

ऐसी मजबूत व् भरोसेमंद डोर भी  नहीं मिलती|

तेरी वजह से जैसी हमें जिंदगी  है मिली ,

वोह कोई जिंदगी तो नहीं !

गर यह जिंदगी नहीं ,तो मौत भी तो नहीं मिलती |

और यदि मौत भी मिल जाये , तो भी !

अधूरी ख्वाइशों की वजह से गति नहीं मिलती|

तू  जिसको मिल जाये ,

वोह  सारी उम्र आशा- निराशा में ही झूलता रहे  ,

तड़पना ही जिसकी नियति बन जाये ,

उसके दिल-ओ -दिमाग को कभी रहत नहीं मिलती|

 

 

 

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

This Post Has One Comment

  1. बहुत सही बात कह दी आपने…

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