अतीत

कहानी (अतीत)
दीपावली आने वाली थी। बस सफाई करने में लग गयी थी। आज पति के आफिस का नंबर था सफाई करने का इसलिए लग गये सफाई करने में, आलमारी से पुस्तकें सम्भाल रही थी कि उसमें हमें एक चिट्ठी मिली पढ़कर आश्चर्यचकित और दंग भी विश्वास नहीं कर पा रही थी चिठ्ठी पढ़ते हुए पुरानी यादों में खो गई।।
मैं अपनी सहेली के घर से लौट कर आयी थी, घर में चहल पहल लग रही थी सभी के चेहरे खुश दिखाई दे रहे थे। सोचने लगी क्या हो रहा है, मां के पास जाकर पूछा ये क्या हो रहा है मां बोली आज तुम्हे लड़के वाले देखने आ रहे हैं जाओ जाकर तैयार हो जाओ। मां मैं अभी बहुत छोटी हूँ बारहवीं में पढ़ रही हूँ। अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूं। मां ने हमें डांट कर कहा हर बात में बहस करती हो तुम्हें नहीं फैसला हमें करना है। हमारे समय में लड़की से उसके सबसे अहम रिश्ते के बारे में पूछा तक नहीं जाता था जहां रिश्ता तय कर दिया जाता था माता और पिता की मर्जी से वहीँ शादी करनी होती थी। आखिर मां के डर से जो हमें अच्छा लगता था वह सलवार सूट पहन लिया।।
शाम को पूरा परिवार हमें देखने आ गया, मुझे वहां ले जाया गया उनके परिवार में सबको पंसद आ चुकी थी। लेकिन जैसे ही मैंने लड़के को देखा मोहित सी हो गई लगा ये तो मेरे लिए लिए ही बने हैं वहां से रिश्ता तय हो गया और मेरी तरफ से भी, मैं फूली नहीं समा रही थी जाने कितने रंगबिरंगे सपने देख लिए थे। जिंदगी जीने के सपने बुन लिए थे। शादी होने की जोरशोर से तैयारी शुरू हो गई घर के अंदर खुशी की लहर दौड़ गई।।
लेकिन अचानक लड़के वालों की तरफ से न हो गई समझ किसी को नहीं आ रहा था आखिर कारण क्या हो गया। घर में मातम सा छा गया। मेरी भी छोटी उम्र थी और मेरे लिए झटका बहुत बड़ा था मैं चुपचाप दुखी मन से स्कूल जाने लगी उस समय के हिसाब से सारा दुख अन्तर्मन में दबा गई। किसी से कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।।
लेकिन उसके बाद मेरा रिश्ता कहीं तय नहीं हो पाया। समय निकलता गया मैंने एम ए बीएड किया एक स्कूल में अध्यापिका हो गई अपने आप को कार्य में व्यस्त कर लिया।।
कहते हैं होनी को कोई टाल नहीं सकता। अगर तुम किसी को शिद्दत से चाहो तो कनायत उसे मिलाने में लग जाती है और यह मेरे लिए एक सच साबित हुआ।।
आज मेरे लिए उनका रिश्ता दुबारा आ गया क्योंकि इनकी पत्नी का किसी वजह से देहांत हो गया था।मेरे मां और पिता तैयार हो गए हमारी शादी हो गई और मुझे मेरा प्यार मिल गया हमारा हंसी खुशी से समय व्यतीत हो रहा था।।
लेकिन आज चिठ्ठी पढ़कर मैं आश्चर्य चकित हो गई थी, मेरी भाभी की चिठ्ठी थी। मेरी भाभी ने मुझे चरित्रहीन व एक बददिमाग वाली लड़की बतलाया था। सोच रही थी क्या मिला भाभी तुम्हें आखिर शादी तो इन्हीं के साथ हुई मेरे माता-पिता को भी कितना कष्ट दिया आखिर क्यों। मेरी आंखों से टप टप आंसू गिरे जा रहे थे???

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