नीरजा

 

नीरजा
कवि नहीं हूँ जो कविता लिख दूँ
नहीं लेखिका जो लिखूं कहानी
हरदम सपनों में रहती हूँ
जो सपना आता लिख देती
भावों से मैं भरी हुई हूं
भाव उतर जाते शब्दों में
ज्ञानी नहीं अज्ञानी हूँ मैं
जाने कैसे लिख देती
उतर आते उद्गार मन के
पन्नों पर लिख देती हूँ
पानी जैसी पारदर्शी हूँ मैं
नाम नीरजा कहलाती हूँ
नहीं नहीं कवि नहीं हूँ
मैं खुद बन गयी कहानी

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