पेड़ों से गिरते पीले पत्तों के जैसे
छोड़ जाते हमको बुर्जुग भी ऐसे
बुजुर्गों की रहती हम पर छाया
आशीर्वाद हमको मिलता ही रहता
बिन उनके दिल दुखी है हमारा
तेज धूप में जलती रेत के जैसा
मेरी निगाहें उनको ढूंढा करती हैं
आंखों में उनकी यादों के साये
खोया जैसे अनमोल खजाना
मां का आंचल नहीं मिलता
बचपन हमारा खो गया जैसे
अब बन गये हम भी बुजुर्ग के जैसे
हल्के पीले पड़ने लग गये
हम भी गिरते पीले पत्तों के जैसे

Say something
No votes yet.
Please wait...