प्रेम की सरगम

आज गीत बने सरगम
हर धुन में बजती रिदम
हवाओं में उड़ती ये धुन
सजन सुन अनुग्रह मेरा ये
प्रिय तुम याद आते हो

चन्द्रिका छिटक रही नभ से
प्रभा ने बदले अपने रंग
इंद्रधनुष फैलाते सतरंग
उनमें बहता अपना रंग
प्रिय तुम याद आते हो

मेरा प्रेम बन रहा अंतरंग
अनुरक्त हो रहा ये मन
आतर हो गया संकल्प
मोह में खो रहा हृदय
प्रिय तुम याद आते हो

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