बेचैन अखियां

छुपी हुई कोई बात मन में,
बड़ी हलचलें मची हैं तन में।
अंखियों में उफनाहट नीर खौला,
कपाटों को खोल धीमे से बहता चला।
आँसू भी बोल गए साथ था तेरा यहीं तक।
कोई ही शायद बचता वरना सब जाते टपक।
मोतिन से चमकता वह; पर दिखता अंगार न निरा,
झरने से बहते हुए कपोलों और हृदय पर जा गिरा।
अंखियाँ भी अब अंधी हुई और हृदय पर आहूति।
सपक-सपक सी सिसकियों से बढ़ी हृदय गति।
अंखियाँ अब मिचतीं चलीं और दंतियाँ भी कढ़ी।
सर्वेश कुमार मारुत

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SARVESH KUMAR MARUT

सर्वेश कुमार मारुत पिता- रामेश्वर दयाल पता- ग्राम व पोस्ट- अंगदपुर खमरिया थाना- भुता तहसील- फरीदपुर बरेली 243503

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  1. khoobsurat Rachna

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  2. Sundar chitran

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