तेरी खामोशी (अहसासों की झलक)

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तेरी खामोशी (अहसासों की झलक)

By |2018-03-12T22:02:38+00:00December 3rd, 2017|Categories: अन्य, कविता|Tags: , , |2 Comments

तेरी खामोशी (अहसासों की झलक)

तेरी प्यासी निगाहों कि कसक यूँ झलके,

के जैसे  शोख़ निगाहें बेसब्री से इंतेज़ार करे है।

चेहरे पे जो प्यारी ये मुस्कान दिखे है,

यूँ लगता है कि तेरी आँखें कोई खूबसूरत दीदार करे है।

यूँ मंद मंद मुस्कुराहट खामोश लबों से भी अल्फाज करे है।

तेरी जुल्फों की बिखरी लटें गहरे सवालात करे हैं।

ऐसा लगता है कि जैसे, बिन काजल, बिंदिया औ लाली के तू श्रृंगार करे है।

कुछ यूँ प्यारा स अहसास दिये है, जैसे कुछ खास करे है।

खिला हो कोई फूल जैसे, तू ऐसी मुस्कान करे है।

मगर! यूँ खामोश लब तेरे जो हजारों सवालात करे हैं,

ये हालात ही हैं जो तुझे बेहाल करे हैं।

मिले जो खुशी उन्हें अहसास तो कर,

सारे लम्हे न सही, कुछ लम्हों पे ऐतबार तो कर।

खुशियाँ जो मिले हैं फिर क्यों अधूरी प्यास करे है।

गुले गुलशन की तरह जो चेहरे पे मुस्कान करे है,

ये सच है कि तू उनसे बेइंतहा प्यार करे है

तू प्यार करे है… हाँ प्यार करे है।।

सुबोध उर्फ सुभाष

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2 Comments

  1. VINEET verma March 14, 2018 at 7:51 pm

    Very nice poem……

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  2. सुभाष March 14, 2018 at 9:56 pm

    सुक्रिया जी

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