जब-जब दुआआे से उठेंगे हाथ ये मेरे खूदा

मेरी जिंदगी से गम को तू दूर कर देना सदा ।।

थमने लगे जब सांस ये कर देना एक अहसान तब,

होना भी चाहूं मै अलग करना मुझे न तू जुदा ।।

रह जाए कुछ बाकी यहाँ जो कर्म मेरे भाग मे

तेरी बंदगी करके सभी वह फर्ज भी करदूँ अदा।

ठोकर जमाने की मिले भीगी हो जब आँखें

मेरी अपने सितम मे बाँधकर कर देना खूद मे तू फिदा ।।

– मुकेश नेगी,

गाैहरी माफी रायवाला, देहरादून

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *