समर्पण

हां!
यह समर्पण है ,आशा विश्वास का, वर्तमान भविष्य का ,नभ-धरा का, जन्म मरण का, सुख दुख का, भाग्य दुर्भाग्य का ।
जिसमें विश्वास और प्यार ऐसी प्रबल डोर है, जो हर डगमगाते फैसले को जोड़ देती हैं और मुहर लगा देती है, साथ निभाने का, यह साथ मैं नहीं जानती सात जन्मों का है या नहीं, इस पूरे जीवन में हरा भरा , फलीभूत हो जाए ।
नए रिश्तो को आयाम मिले कुछ अनसुलझी गुत्थी, दर्दीले पढाव तो हर किसी की राहों में आते हैं ,पर ज़िंदगी की उस सुबह को देखो जो इस अमावस की रात की काली मां को लील लेगी ।बस मन से समर्पण के जरूरत है वह सकारात्मकता की जरूरत है जो नीम के पेड़ को कड़वा ना मानकर उसके फायदे से रूबरू होकर उसका महत्व समझ जाता है क्योंकि हर कढवी चीज केवल कड़वा समझकर फेखना बुद्धिमत्ता नहीं ,करेला और नीम इसके बेमिसाल उदाहरण है।आप केवल बाहरी रूप से भयभीत है वह कड़वापन उसकी तासीर है, बाहरी वातावरण, परिस्थितियां, तापमान ,मौसम सब समेकित है उसमें।पर उसके फायदे हमें निरोग और स्वस्थ जीवन देते हैं कहने का आशय है आप बाहरी कठोरता से मत घबराइए। अंदर का आवरण नारियल सदृशय है ।
इसलिए अपनी खुशियां ,विश्वास, अपनेपन को समर्पित कीजिए कोई भी रिश्ता तभी पूर्ण होता है जब उसमें स्वार्थ रहित प्रेमपूणॆ समॆपणहो।
जीवन की इस दौड़ में दो राही हमसफ़र बनने जा रहे हैं अपने प्यार और विश्वास की जीन थामें रहिए ,यद्यपि जिंदगी की दौड़ बहुत तेज है, पर आपका साथ आपके ख्वाहिशों के घोड़े को दौढ़ा देगा , तो डर संशय, आशंका को छोड़कर दोनों प्यार और समर्पण के साथ आगे बढ़िए ,
अगर आप मधु है तो करेला और नीम मधुमेह से बचाएंगे, आप समझ ला लीजिए और करेले को कसैला होने से बचा लीजिए अनुराग अग्रवाल

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