क्यों न पूजे हम शहीद को

अठारह सौ सत्तावन से, वर्षों चली लड़ाई थी
ताप्या,मंगल,खुदीराम ने हमको राह दिखाई थी
सुखमय जीवन त्याग रानी ने, दुश्मन को ललकारा था
साथ खड़े थे कई सरफिरे, मुख में बस जयकारा था
जिन्होंने मुल्क है लहू से सींचा, उनपे हम अभिमान करें
क्यों न पूजे हम शहीद को, क्यों न हम सम्मान करें

लगी जो जलने चिता वीर की, आग दिलों में दहक रही थी
खड़े हो गये कितने योद्धा, आजादी अब महक रही थी
रौशन,बिश्मिल,अश्फाक ने, दुश्मन को यूं तोड़ा था
हस्ते हस्ते चढ़ फांसी पे, सफर-ए-जीवन छोड़ा था
भारत के सच्चे वीरों को, नमन ये हिंदुस्तान करे
क्यों न पूजे हम शहीद को, क्यों न हम सम्मान करें

लाल-बाल-पाल ने लड़कर, अपने प्राण गवाये थे
कुछ गद्दारों ने भी हर पल, अपने फर्ज निभाये थे
चंदशेखर की नीति देख, अंग्रेज हुकूमत दहली थी
भारत माता ने भी वर्षो, बड़ी गुलामी सहली थी
लिखे #जतिन सेवक माता का, सेवा ये नदान करे
क्यों न पूजे हम शहीद को, क्यो न हम सम्मान करें

राजगुरु,सुखदेव,भगत ने, अपना फर्ज निभाया था
चूम के रस्सी के फंदों को, बाहर का मार्ग दिखाया था
नेता के तपमय जीवन ने, अब तक किया उजाला है
रक्त से मिट्टी लाल हो गई, तब से हिन्द निराला है
उनको मिले मौत सजा में, जो इनका अपमान करे
क्यों न पूजे हम शहीद को, क्यो न हम सम्मान करें

कवि जतिन फैजाबादी

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