जंगल की लड़ाई

जंगल मे अब
लड़ाई चल रही है
सखुआ के पेड़ मे
मनुष्य का खुन लगा है
और जमीन पर तो _
मनुष्य का सर लुड़क राहा है

जंगल को गुलाम
करने का लड़ाई
जमीन के अंदर की दौलत
लुट्ने की लड़ाई
अब जोर पकड़ रही है

उस अोर से कमांडो
इस अोर से कमरेड
उसके बीज
सखुआ के आड़ मे
आदिवासी रो रहे है

उस अोर से कमांडो के
हिप -हिप हुर्रे
इस अोर कमरेडोँ के
हुल (?)गीत से
जंगल भर गया है _
अैार
आदिवासियों के
रोने की आवाज
लड़ाई की शोर से
दब गया है

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