मेरी जरूरत

आज फिर दिल में बेचैनी है,…

आँखो में नमी है,…..

फिर से साँसे मद्धम है,….

उंगलियो मे कम्पन है,….

आज फिर सहम गई हुँ मै,…..

डर कर चिख़ पड़ी हुँ मै,….

पुकार रहा मेरा दिल माँ को,….

तड़प रहा आँचल की छाँव को,….

उनके हाँथो की थपकीयों को,….

उनके ममता भरे छपकियों को,….

आज फिर पाँवो मे लड़खड़ाहट है,….

दिल में फिर किसी डर की आहट है

– स्वाति सिन्हा

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