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By |2017-12-20T22:27:08+00:00December 20th, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|Tags: , , |0 Comments

समझदार बन कर रहो, मिले सदा सम्मान।
जीत उसी की है यहां, जो है चतुर सुजान।।

पूजनीय होते सभी , मित्रों उम्र दराज़।
अपमानित करना नहीं,आजाओ तुम बाज़।।

कटुता वाणी में बुरी , इसमें मिश्री घोल।
कोई दिल टूटे नहीं , ऐसी वाणी बोल।।

सुन अगले की बात भी,कर के बन्द स्व राग।
राज तंत्र भी गुम हुए , दे कर हमें स्वराज।।
पंकज शर्मा”तरुण”.

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