दीर्घ-संचित हृदय लिए मै नवयौवना,

जाने किसे ढ़ूढ़ रही हूँ,

मधुवन बीच विचरते करते मेरे नयन,

नभ के नीलेपन को देख रहे है,

मृदु-रथ पर आएगा वो मेरे,

स्वप्न का राजकुमार,

देखकर हृदय मोर नाचने को,

बियाकुल होगा,

नकाबपोशो की तरह मेरे जीवन मे,

आन बसा है,

कलि-क़ुसूम सी मै निहार रही,

उसको पथ,

आएगा वो………मेरा प्रियतम।

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