तरही गजल :-

बेरहम तूफान हो गये।
लोग बे मकान हो गये।।

चीख औ पुकार मच गई।
बहरे हुक्मरान हो गये।।

दुर्गुणों की खान हो गये।
जबसे वो महान हो गये।।

बाजार के माहौल में आकर।
हम भी तो सामान हो गये।।

गरीब और अमीर आजकल।
कहने को समान हो गये।।

मुश्किलों में हम पड़ गये।
अपने भी अन्जान हो गये।।

भौंह और निगाह मिल गये।
तो तीर और कमान हो गये।।

बाद में वो देवता बने।
पहले जो इन्सान हो गये।।

– जयराम राय

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