नववर्ष

नववर्ष की दस्तक आते ही
सपनों में रंगीन रंग आ जाते हैं
जब गांव की गौरी चलने लगती
झमझम पायल बजने लगती
मन मयुर झूमने लगने लगते हैं
जीवन महकने लगते हैं

नववर्ष की दस्तक आते ही
सपनों में रंगीन रंग आ जाते हैं
पेड़ों पर रंगत आ जाती हैं
खुशहाली बहारें लाती हैं
मौसम सुनहरे लगने लगते
युवा नित रोज मल्लारें गाते हैं

नववर्ष की दस्तक आते ही
सपनों में रंगीन रंग आ जाते हैं
खेतों में पीली सरसों छाजाती हैं
कोयल नयी तान छेड़ने लग जातीं
चिड़िया की चहचहाट आने लगती
बागों में मोर नचाने लगते हैं

नववर्ष की दस्तक आते ही
सपनों में रंगीन रंग आ जाते हैं
कुछ कार्य अधूरे बाकी हैं
चक्रव्यूह ना हम फंस जाएं
मनोयोग हमारे अपने हैं
हम सच्चे भारत वासी हैं

No votes yet.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply