2 जून की वह तपती दोपहर, जब सूर्यदेव बहुत ही तीव्र गति से धरती पर अंगारों की बारिश करने में मशगूल थे, उसी समय 18 वर्षीय एक नवयुवक संदीप अपने पूरे उत्साह के साथ साईकिल पर सवार होकर अपने गंतव्य (परीक्षा केंद्र) की ओर बढ़ता चला जा रहा था, जो उसके घर से लगभग 12 किमी. दूर था | पसीने से लथपथ और मुँह पर रुमाल को बाँधे संदीप पर तो बस एक ही धुन सवार थी कि कैसे भी करके वह दोपहर 01:00 बजे तक परीक्षा केंद्र पर पहुँच जाये | उ.प्र.के एक छोटे गाँव रोशनपुर में रहने वाले एक किसान रामधीन का मंझला पुत्र था संदीप, जो बचपन से ही पढने- लिखने में बहुत होशियार था | गाँव के ही प्राइमरी फिर जूनियर हाईस्कूल में ही उसकी प्रारंभिक शिक्षा – दीक्षा संपन्न हुई थी | इसके बाद की शिक्षा के लिए वह अपने घर से 10 किमी. दूर इंटर कालेज जाता था | ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने और माता -पिता की ओर से भी कोई विशेष सहयोग न मिल पाने की वजह से उसको अपनी शिक्षा के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन विधालय के शिक्षकों द्वारा संदीप की पढ़ने में रुचि तथा उसके कुछ कर गुजरने की प्रबल इच्छा को देखते हुये उनका सहयोगपूर्ण व्यवहार और उत्साहवर्धन संदीप को निरंतर प्राप्त होता रहता था | पढने -लिखने में सदैव अव्वल रहने की वजह से संदीप को छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती थी | अपने अथक परिश्रम, विधालयों के शिक्षकों व माता-पिता के आशीर्वाद के फलस्वरुप संदीप ने जूनियर हाई-स्कूल की परीक्षा सर्वोच्च अंको के साथ उत्तीर्ण कर ली थी, उसकी इस सफ़लता से जहाँ एक ओर उसके माता-पिता बहुत खुश थे वहीं संदीप को अपने आगे आने वाले कल की चिंता सता रही थी, क्यों कि गाँव में जूनियर हाई-स्कूल के बाद की शिक्षा ग्रहण करने का कोई प्रबंध न था साथ ही साथ संदीप को यह भी दुविधा थी कि क्या उसके माता – पिता उसकी आगे की शिक्षा के लिए राजी होंगे ? इसी उधेड़बुन के बीच गाँव के प्रधान का आगमन संदीप के घर पर होता है जो संदीप को उसकी सफलता की शुभकामना देने के लिए आये हुए हैं, संदीप अपने मन की बात उनके समक्ष रखता है, उसके बाद ग्राम प्रधान के प्रयासों से संदीप का दाखिला घर से 10 किमी. दूर एक इंटर कॉलेज में हो जाता है | कॉलेज में दाखिला होते ही संदीप के सपनो को तो मानो जैसे पंख ही लग जाते हैं और वह पूरे उत्साह व लगन से साईकिल से 10 किमी. दूर कॉलेज आने – जाने लगता है | कॉलेज में वह पूरी तन्मयता के साथ पढ़ता फिर कालेज से लौट कर घर तथा खेत पर माता – पिता की मदद करता , कुछ ही समय में संदीप की गिनती कॉलेज के होनहार बच्चों में होने लगी थी, कॉलेज में होने वाली तिमाही, छमाही व सालाना परीक्षाओं व साथ ही साथ खेलकूद की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी वह सर्वोच्च स्थान हासिल करता, संदीप द्वारा किये जा रहे शानदार प्रदर्शन की वजह से ही उसको इस कॉलेज में भी छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाने लगी और कहीं न कहीं संदीप को छात्रवृत्ति की आवाश्यकता भी थी, क्योंकि संदीप के पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी वह संदीप की शिक्षा का बोझ उठा सकें , लेकिन अब संदीप की मुश्किलें कुछ आसान हो चलीं थी | कक्षा 9 की परीक्षा अच्छे अंको से उत्तीर्ण करने के साथ ही संदीप अगले वर्ष होने वाली कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए जी – जान से जुट गया था, साल भर जी- तोड़ मेहनत करने वाले संदीप को देखकर कालेज के समस्त शिक्षकगण व उसके सहपाठियों को भी यह अटूट विश्वास हो चला था कि संदीप निश्चित तौर पर विधालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करेगा, जल्द ही बोर्ड परीक्षाओं की तिथि भी समीप आ गयी, संदीप ने बहुत ही अच्छी तरह से परीक्षायें दी, लगभग दो माह जब परीक्षा परिणामों की घोषणा हुई तो हर कोई आश्चर्य चकित था, क्योंकि संदीप ने उम्मीदों से बढकर सफलता प्राप्त की थी | विधालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के साथ ही संदीप ने बोर्ड की मेरिट सूची में 12 वां स्थान भी प्राप्त किया था | संदीप के इस सफलता की सूचना प्राप्त होते ही पूरे गाँव में उत्सव जैसा माहौल था, छोटा – बड़ा हर व्यक्ति संदीप के घर पर उसको व उसके माता-पिता को बधाईयां देने में व्यस्त था | संदीप की सफलता थी भी अभूतपूर्व, आखिरकार संदीप ने अपने गाँव व जनपद का नाम जो पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया था | इस अवसर पर जनपद के जिलाधिकारी महोदय व कालेज प्रशासन ने संदीप को सम्मानित भी किया था | संदीप को अब पुन: अपने आने वाले कल की फिक्र हो चली थी, उसने कक्षा 11 में प्रवेश लेते ही यह निर्णय कर लिया था कि वह इसके साथ ही एन.डी.ए परीक्षा की भी तैयारी भी शुरु कर देगा, इसी बात को ध्यान में रखते हुए उसने कक्षा 11 में गणित वर्ग का चयन किया था | अब संदीप ने पहले की अपेक्षा दो-गुने उत्साह से अपनी तैयारी शुरू कर दी थी, उसके द्वारा किये जा रहे अथक परिश्रम को देखकर किसी को भी उसकी सफलता को लेकर रत्ती भर भी संदेह नहीं था | इसी क्रम में संदीप ने कक्षा 11 की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, अब संदीप के सामने लक्ष्य के तौर पर कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा और एन.डी.ए की परीक्षाएं थी | दोनो ही परीक्षाओं की तैयारी संदीप द्वारा युद्धस्तर पर की जा रही थी | पलक झपकते ही वह समय भी आ गया जब 12 वीं की बोर्ड परीक्षा प्रारम्भ हो गयी और संदीप ने अच्छी तरह से कक्षा 12 की परीक्षाएं दी | अब संदीप के समक्ष उसके अगले लक्ष्य के रुप में एन.डी.ए की परीक्षा थी, जो लगभग दो माह बाद आयोजित होने वाली थी, जिसके लिए संदीप दिन – रात एक किये हुए था | कुछ समय बाद कक्षा 12 की बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम घोषित किये गये | एक बार फिर से संदीप ने अपनी सफ़लता का परचम लहराया और जनपद में सर्वोच्च स्थान हासिल करते हुए मेरिट में 14 वां स्थान प्राप्त किया, इस सफलता ने संदीप को एन.डी.ए परीक्षा के लिए मानसिक रुप से सबल बना दिया था | जिससे अब संदीप जबरदस्त आत्मविश्वास से लबरेज था | इस सफलता ने संदीप को पूरे जनपद में भी प्रसिद्धि दिला दी थी, लेकिन इस प्रसिद्धि से इतर संदीप का ध्यान पूरी तरह से अपने लक्ष्य एन.डी.ए की परीक्षा पर था | क्योंकि 3 दिन बाद एन.डी.ए की परीक्षा संपन्न होनी थी | उसी क्रम में संदीप परीक्षा वाले दिन भरी व तपती दोपहर में लगभग 01:00 बजे तक अपने पूरे प्रयास के साथ घर से लगभग 12 किमी. दूर परीक्षा केंद्र पर पहुँच चुका था | अपनी साईकिल को नियत स्थान पर रख कर संदीप परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर बनी कतार में खड़ा हो गया था , क्योंकि परीक्षा केन्द्र में प्रवेश करने का समय 01:15 निर्धारित था, कतार में खड़ा संदीप परीक्षा का प्रवेश पत्र जेब से निकालकर अपने हाथ में ले-लेता है और स्वयं की बारी आने की प्रतीक्षा करने लगता है, जैसे ही संदीप प्रवेश द्वार पर उपस्थित जांचकर्मी को अपना प्रवेश पत्र जांच के लिए देता है, जांचकर्मी द्वारा प्रवेश पत्र के साथ एक आई.डी. प्रूफ की माँग पर संदीप के तो जैसे ‘पैरो तले जमीन ही खिसक जाती है’, क्योंकि उस समय संदीप के पास किसी भी प्रकार का कोई आई.डी. प्रूफ मौजूद नहीं था और बिना किसी आई.डी. प्रूफ के परीक्षा केन्द्र में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जायेगा ऐसा स्पष्ट रुप से जांचकर्मी बोलता है, अब संदीप के लिए ‘काटो तो खून नहीं’ वाली स्थिति थी क्यों कि संदीप के पास इतना समय भी नहीं था कि वह घर जाकर कोई भी आई.डी. प्रूफ ला सके या किसी से मंगवा सके | काफी मिन्नतों और उसके द्वारा यह कहने के बाद भी कि अभी उसको परीक्षा देने की मोहलत दे दी जाये परीक्षा संपन्न होते ही वह आई.डी. प्रूफ़ लाकर दिखा देगा वह लिखकर भी देने को तैयार है अगर वह ऐसा न कर पाता है तो आप मेरी उत्तर पुस्तिका यहीं पर रोक लीजियेगा, क्योंकि अभी तुरंत घर जाकर आई.डी. प्रूफ लाने का कोई औचित्य नहीं है परीक्षा छूट जायेगी, लेकिन प्रवेश द्वार पर जांचकर्मी संदीप की एक न सुनता है और उसके सारे प्रयास विफल साबित होते हैं,संदीप को परीक्षा केन्द्र के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाता है, बुझे मन से संदीप मायूस होकर अपना सिर पकड़ कर बैठ जाता है,जैसे उसका सब कुछ लुट सा गया हो, अब आने वाले कल की चिंताओ के बीच उसका दिमाग बस एक ही बात पर अटका था और वह था…. ‘आई.डी. प्रूफ ‘

सुमित कुमार गुप्ता

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