गांव देहात में मान्यता है कि यदि किसी चिट्ठी का कोना फटा हुआ हो तो किसी के निधन का समाचार होता है।इसी पर आधारित यह लघुकथा पढिए—-‘

कुछ महीने पहले ही शशि की शादी हुई थी अभी उसने ठीक तरह से परिवार के सदस्यों को जाना भी नहीं था । और रीति रिवाज़ जानने में तो और भी अधिक समय लगता है।
एक दिन दोपहर को काम निबटा कर अपने कमरे में सुस्ता रही थी कि अचानक घंटी बजने की आवाज़ आयी तो उठकर दरवाजा खोलने गयी। पडौस का एक बच्चा हाथ में एक चिट्ठी थमा कर चला गया । ससुर जी के नाम की थी, तो उसने ले जाकर सासू माँ को दे दी । उन्होने देखते ही पूछा कि कहाँ से आया है। तो शशि ने भेजने वाले का नाम बता दिया पढ़कर । वह पत्र उन के भाई यानी मामाजी ने भेजा था । पत्र देखते ही सासू माँ ने तो ज़ोर ज़ोर से रोना शुरु कर दिया । वह कुछ समझ नहीं पा रही थी ।इतनी देर में उसने सुना कि वे कह रही थीं कि बाबूजी हमें क्यों छोड़ गये आप? और रोये जा रही थीं । बेचारी नयी बहू को समझ नहीं आ रहा था कैसे सम्भाले , क्या करे , क्या कहे ! उसने उन्हे चुप कराने का खूब प्रयास किया और पानी पिला कर अपने देवर के पास खबर भिजवाई (उन दिनों फोन कम ही थे ) जो कि ससुर जी के साथ दुकान पर था ।खबर पाते ही दोनों दौडे चले आये । ससुर जी बोले कैसे हुआ यह सब ? कुछ लिखा है पत्र में ? अरे कुछ बताओगी भी । कहाँ है पत्र दिखाओ तो मुझे ।
बहू ने खत लाकर दिया। पिता जी ने खत को खोला और पढकर बोले इसमें तो ऐसा कुछ भी नहीं लिखा ।किसने कहा तुम से कि तुम्हारे बाबूजी सिधार गये ?
क्या ! हैरान सासू माँ रोते रोते बोली , “लेकिन इसका कोना तो फटा हुआ है ।”
ससुर जी ज़ोर से हंस कर बोले अरे भागवान तुम्हे पढ़ना नहीं आता तो कम से कम पढवा ही लेतीं बहू से ।और बहू तुमने भी पढ्ने का कष्ट नहीं किया ? ”
बाबूजी पत्र आपके नाम का था तो मैने माँ जी को दे दिया ।”
पिता जी ने खूब मज़ाक उड़ाया मांजी का। हद होती है भई अन्धविश्वास की ! सब खूब हंसे और पिताजी ने मांजी के मायके फोन लगा कर उनकी नाना जी से बात भी करवायी ।

– मंजु सिंह

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