अठखेलियां खेलें जुल्फें हमारी
प्रेमरस में मन डूबा हुआ है
याद आने लगा वो प्रेम तुम्हारा
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

अन्तर्मन में छुपी हैं भावनाएं
मन अपने अंदर खोने लगा है
प्रेम हृदय को शब्दों में उतारें
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

नदियां सागर से मिलने को तरसे
फंसाने बनने लगे हैं प्रेम के
कथानक बने तुम शरमाते
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

व्याकरण बन गया प्रेम हमारा
सौंदर्य निखारती उपमा तुम्हारी
अलंकारों से वह सजाती नीरजा को
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

#नीरजा शर्मा #

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