नन्ही प्रेमिका

Home »  नन्ही प्रेमिका

 नन्ही प्रेमिका

पहली और आख़िरी प्यार की चिट्ठी

एक पैगाम ईश्वर का

जो मुझ तक न पहुँचकर भी पहुँचा।

 

ज़िंदगी के भोर की मासूम पहली किरण

सूरज की उष्मा

जिसके ताप से हर क्षण साँस है मुझमें।

 

मेरे होने के गीत की पहली पंक्ति

अस्तित्व का नाद

शब्द बन मानस को रचता जो।

 

प्यार के अनुशासन का प्रथम यूनिफॉर्म

स्कूल के दिन

जो रंग, आसमानी एहसासों से भरता है रोज़।

 

प्रेम के नवजात शिशु की मानवीय महक

जीवन के वृक्ष का पुष्प

जिससे ही जीता आया अब तक बालपन।

 

अनछुए स्पर्शों का इकलौता तुलसीपत्र

पवित्रता के सोपान

चरण-दर-चरण जिसके चौरे पे चढ़ते हैं अश्रु-कण।

 

वक्त के समंदर की शाश्वत गहराई

ऋत की ऋचा प्रथम

जो मुझमें गूँजता है, यही तो।

 

किशोर आँखों की निश्छल चमक

अपलक दृष्टि

जो वही-वही तो नजर आता है सब कुछ।

 

एक मात्र प्रार्थना

जागती आँखों का सुनहरा ख़्वाब

जिसके पूरे होने की आस में हूँ अब तक।

 

कापियों मे दबी गुलाब की पँखुरी

एकतरफ़ा प्यार की निशानी

ये सच मेरी तरह अब भी मुझमें ज़िंदा है।

 

उसके नाम से भरे पत्ते !

अनजाने ही साधनारत, ऋषि की तपस्या।

Say something
Rating: 1.8/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

One Comment

  1. Onika Setia December 30, 2017 at 12:34 pm

    अति सुंदर v भावपूर्ण

    No votes yet.
    Please wait...

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link