अक्षर-अक्षर,  खत में लिखकर,

खत को लेकर, घूमूं फिर…

अक्षर-अक्षर, तुम्हे पिरोकर,

अक्षर – अक्षर, चूमूं फिर…

फिर जब ये, मधुरस पीकर,

खत तुम तक पहुंचेगा…

अधरों से, छू लेना अपने,

ख्वाबों में ही, झूमूं फिर…

– वंदना अहमदाबाद

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One Comment

  1. Onika Setia

    अति -सुंदर रचना .

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