आली री आली

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आली री आली

By |2018-01-20T17:04:18+00:00December 29th, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

कहीं मैं हूँ कहीं मेरा दिल है
आकाश में उडूं यही मेरा मन है
सुनहरी सी किरणें फैली जहां में
सुर्यप्रभा मुझसे मिलने को तरसे
आली री आली करूं तुझसे बतियां
कूदती नदियां में उछलता है पानी

पैर पड़ते नहीं धरती पर मेरे
घूमती हूँ मैं काली घटा बनके
बादल करे मुझसे प्यारी बतियां
चांद सितारे देख मुझे जलते
आली री आली करूं तुझसे बतियां
कूदती नदियां में उछलता है पानी

सूर्यमुखी सी हमेशा हूँ खिलती
रातों में जूगनु सी हमेशा चमकती
अदभुत मुझसे जहां में नजारा
आली तेरे आगे मेरा सिर झुकता
आली री आली करूं तुझसे बतियां
कूदती नदियां में उछलता है पानी

#नीरजा शर्मा #

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