आज अलमारी साफ करते
मिले पुराने खत तुम्हारे
जिनमें आज भी आ रही है
तुम्हारे प्यार की खुशबू
आज भी याद है
वो पहला खत तुम्हारा
तुम्हारे प्यार से भी प्यारा
एक एक शब्द प्रेम में पगा
तुम्हारी छुअन हो ऐसा लगा
उसे जाने कितनी बार पढ़ा
तुम्हारी सलोनी मूरत को मन में गढ़ा
भेजा करते थे गुलाबी चिट्ठी
बातें होती थीं वो खट्टी मिट्ठी
करती थी इंतज़ार हफ्तों तक
तब कहीं आता था वो प्यारा खत
डाकिया देके जब भी जाता था
कोई न कोई उठा लाता था
और मुझे घण्टों वो सताता था
तब कहीं मेरे हाथ आता था
याद है अब भी वो सारा मंजर
मेरे सपनों में था यह प्यार घर
मेरी आंखों में था सुहाना सफर
मेरा साथी , मेरा हमसफर ।

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2 Comments

  1. सुन्दर प्रेम पत्र के लिए मंजू जी को धन्यवाद आपने प्रेम की परिभाषा बड़ी ही सुन्दर दी है

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  2. Manju Singh

    जी बहुत आभार !

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