रस रक्त से एक पिंड बनाया
नारायण सा रंग रूप बनाया
प्राण पण से प्राण जगाया
भाव भर कर भक्त बनाया

पूरी शक्ति से सशक्त बनाया
मानवता का सुर सुक्त पढाया
तब जाकर यह संसार दिखाया
स्नेह उँडेल सागर भर डाला
शिव बन हर कष्ट पी डाला

दुनियां का दस्तूर सिखाया
शिव पिता है आप शिवाया
खेल कूद में कला सिखाए
सीख सिखाए मानव बनाए
खिला पिला कर हमें बढाए
आप निरक्षर पर हमें पढाए

सबसे पहले हमें खिलाए
आप जगे पर हमें सुलाए
कथा कहानी लोरी सुनाए
सुला सुला कर हमें जगाए

घर आँगन में धूम मचाएं
हम रूठें और आप मनाएं
रूठ रूठ कर हम सताएं
दुख देकर भी सुख पाजाएं

पुत्र हित में सब कुछ समर्पित
तेरे चरण में श्रद्धा सुमन अर्पित
भय सताये आंचल में छुप जाएँ
त्रिलोकी में ऐसा सुख नहीं पाएँ

आज सारा जहां चमन है
लगता यह तेरा ही मन है
तेरा सब तुझको अर्पण है
तेरे चरण में कोटि नमन है
तूं धरती माँ आप गगन है
तेरी स्मृति में मगन मगन है

– मगन सिंह जोधा

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