प्रेम पत्र

Home » प्रेम पत्र

प्रेम पत्र

By |2018-01-20T17:04:13+00:00January 6th, 2018|Categories: कविता, प्रेम पत्र|Tags: , , |0 Comments

सीधी रेखाओं से
बहुत ही सरल आकृतियां
बनती रही हमेशा
और मई उनमे ही खोजता रहा तुम्हें

तुम्हारा सौंदर्य
तुम्हारा प्रेम
तुम्हारी चंचलता
अल्हड़ता
कितना कुछ खोजता था
उनमें

पर तुम हरगिज
नहीं थी उनमें

रेखाओं को थोड़ी
वक्रता दी
तो लो तुम चिहुंक उठी

जी उठी
जैसे फूंक दिए हों
प्राण किसी पाषाण में

अब तुम्हारी तस्वीर
मेरे ह्रदय के कैनवास पर
ज्यादा मुकम्मल बन रही है

सुधीर देशपांडे

Say something
Rating: 4.2/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment