विचारों का टकराव

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विचारों का टकराव

By |2018-01-20T17:04:12+00:00January 7th, 2018|Categories: आलेख|Tags: , , |0 Comments

अपने बच्चों के साथ व्यवहार करते हुए कई बार हमे बहुत इम्तहानो से गुजरना पडता है।परिवर्तन तो समय का नियम है।जो बात हमारे नजरिये मे सही हो ,हो सकता है समय ने उसके मायने बदल दिये होँ,वही बात आज के दौर मे बच्चों से हजम ना हो।परन्तु हमै अपने नजरिये को एकबारगी तो उनके सामने प्यार से रखना  चाहिये इसके बाद उन्हें स्वतन्त्रता देनी चाहिए कि वो किसी विषय पर अपना निर्णय उचित रूप से लें।परिवार का वास्तविक रूप भी यही है कि जहाँ मतभेद हों वहां उन्हें बातचीत से सुलझा कर जीवन को व्यवस्थित रहने दें ।विचारों की असमानता तो इतना  शास्वत सत्य है जैसे हाथों की पांच ऊंगलियां ।व्यवहारकुशलता से विचारों के टकराव को रोक कर कई समस्याएं सुलझ जाती हैं और अपने,अपने रहते हैं

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