सीमा अपने पति सास ससुर और दो बच्चों के साथ रहती थी| सीमा नौकरीपेशा थी और उसकी सास घर संभालती थी|चूकिं सीमा को घरेलू कार्यों के लिए समय नहीं मिल पाता था अतः घर के सभी सदस्यों की पसंद नापसंद का ख्याल रखने के साथ-साथ सीमा और राजेश का टिफिन तैयार करना, बच्चों की ट्यूशन इत्यादि कार्य भी सीमा की सास ही करती थी|
सीमा की सास अपने बेटे बहू के कार्य के प्रति समर्पण से बहुत खुश और गौरान्वित थी|
एक दिन अचानक सीमा की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई अत: सीमा को अपने और राजेश के टिफिन के साथ-साथ बच्चों के टिफिन और पूरे परिवार का नाश्ता बनाना पड़ा| ऑफिस जाते जाते भी कुछ देर हो गई और सुबह सुबह राजेश से भी अच्छी कहासुनी हो गई|
ऑफिस में भी मन नहीं लगा और वह आधी छुट्टी लेकर घर चली आई| घर पहुंची तो पाया कि सासू मां ससुर जी को खाना खिला रही हैं बच्चे पास्ता खा कर खेल रहे हैं |रसोई से सब्जी की खुशबू आ रही हैं |सीमा के मन में विचार आया कि “जब सुबह सासु मां की तबीयत इतनी खराब थी, तो अब ठीक कैसे हो गई “उसे लगा कि सासु मां ने सुबह बहाना बनाया होगा उसके मन में विचार आने लगा की दुनिया की सारी सांसें एक सी होती हैं|
बहू चाहे घर की समृद्धि के लिए अपनी जान भी दे दे सास को फर्क नहीं पड़ता अरे यदि इन्हें आराम ही करना था तो रात को कह देती कम से कम सुबह राजेश से कहासुनी तो नहीं होती सीमा के मन में ऐसे ख्यालात चल रहे थे कि अचानक उसकी सास ने उसे संबोधित करते हुए कहा “अरे बहू आज तुम जल्दी आ गई चलो अच्छा हुआ तुम्हारे पसंद की मटर पनीर की सब्जी बनाई है जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जाओ और खाना खा लो और हां राजेश मेरी दवाई लेकर आया था उसे भी खाना खिला कर भेजा है |बच्चे पास्ता की जिद कर रहे थे तो उन्हें भी बनाकर खिला दिया”|
सीमा चुपचाप खड़ी सब सुन रही थी उसने व्यंग से पूछा “सासू मां आप तो बिल्कुल भली चंगी लग रही हैं सुबह तो आप बेसुध सो रही थी लगता है दवा जल्दी असर कर गई|” सासु मां ने कहा “नहीं बहू दवा में इतना सर कहां वह तो मैंने अभी तक ली भी नहीं है सुबह तुम्हें ऑफिस जाते समय कितनी परेशानी हुई तुम्हें और राजेश को भी कहासुनी करते हुए सुना बच्चों को भी जल्दी-जल्दी स्कूल जाते हुए देखा| मुझे लगा की बेचारी बहु पर मेरी तबीयत के कारण कितनी परेशानी आ गई ,यह सोच कर ही मुझ में ताकत आ गई| वैसे तु चिंता मत करना BP कुछ हाई आया है ,थोड़ी शुगर ज्यादा है और इस उम्र में कॉलेस्ट्रोल तो थोड़ा बढा हुआ रहता ही है| इतना सुनते ही सीमा की आंखें छलक पड़ीं
वह सोचने लगी कि “मैं कितनी बुरी हूं मैंने तो ढंग से सासू मां की तबीयत भी नहीं पूछी और अपनी तबीयत खराब होने पर भी हम सभी के बारे में कितना कुछ सोच कर अपने कर्तव्य के निर्वाह में लग गई सचमुच मेरा दृष्टिकोण कितना गलत था”|

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  1. सुन्दर लघुकथा

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