मोबाइल

मोबाइल ने भी क्या कमाल कर दिया,

एकल परिवार को जॉइंट में बदल दिया !
हम दो हमारे दो का नारा कभी बुलंद था
आज भी हम दो हमारे दो का चलन हैं
पहले थे परिवार में मियां बीबी और बच्चे,
अब हम ,मेरे मोबाईल ,whatsapp और फेसबुक से चिपके
जब मन बेचैन हुआ तब ‘ गूगल बाबा ‘को याद किया
हर परेशानी का हल चुटकी में पा लिया
सामने बैठे लोगो से हम दूर- दूरऔर दूर हैं,
अपने अपने मोबाइल परिवार में मशगूल हैं।
कैसी हैं आदमी ये तेरे दिल की ख़ुदाई
सजीव पुतले की जगह निर्जीव ने बना

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This Post Has One Comment

  1. सुन्दर कविता

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