तब्बसुम तेरे प्यार का

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तब्बसुम तेरे प्यार का

By |2018-01-20T17:04:10+00:00January 9th, 2018|Categories: कविता, प्रेम पत्र|Tags: , , |0 Comments

गिरती बुँदे तरूओ से छन कर,

मेरे मुख-मण्डल को भिगो रही है,

मधूर उषा की अँगराई,

मेरे रोम-रोम को महका रही है,

मेरा हृदय अठखेली करता वाचाल पलो मे,

तेरे प्यार का तब्बसुम

आरोही-अवरोही कर रहे है,

क्षितीज छोर पर दीप्ती -भाल

मेरे सौदर्य को दमका रहे है,

मै रक्तिम-स्वर्णिम पथ पर बैठी,

महसूस कर रही हूँ तुम्हे,

हृदय गगन पर छाया है ऐसे,

तेरे प्यार का तब्बसुम

मानो मै संगिनी हूँ तेरे जीवन का…।

 

 

 

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