प्रधानाध्यापक जी- “हरिराम बधाई हो रोशनी बिटिया ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है ,वह बारहवीं में विज्ञान वर्ग से मेरिट में आई है ,अब तो इसे शहर में भेजकर डॉक्टरी की तैयारी करवाओ |जिससे गांव को एक अच्छा डॉक्टर मिल सके|
और हरिराम तुमने यह बहुत अच्छा किया कि बिटिया की पढ़ाई के लिए पहले से लोन अप्लाई कर रखा है|
हरिराम- नहीं मास्टर साहब लोन तो मैंने अपने बेटे जगत के लिए लिया हैं |वह भी 2 साल से दसवीं कक्षा में फेल हो रहा है ,तो मैंने सोचा इसे शहर में कोई काम सीखने के लिए भेज दूं ,जिससे यह अपने पैरों मेंं खड़ा हो सके|
रोशनी बिटिया तो 12वीं तक पढ़ ही ली है ,अब मेरी ताकत उसे और पढ़ाने की भी नहीं है और फिर 2 साल बाद तो रोशनी सयानी भी हो जाएगी तब उसके हाथ पीले कर दूंगा|
प्रधानाध्यापक जी स्तब्ध रह जाते हैं और सोचते हैं “कि आज भी लोग बेटे बेटी में भेदभाव रखते हैं बेटियां कितनी भी योग्य क्यों ना हो, फिर भी वह बेटों को ही प्राथमिकता देते हैं”|

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