पहले प्यार का पुराना वह खत मिला
देखते ही दिल खुश सिरहन हुई, फिर से पुराने जज्बातों का सैलाब उमड़ पड़ा|
खत पर निगाहे टिक गई,
आंखें शर्म से झुक गई,
चेहरा फिर आज लाल गुलाब हुआ |
वह भी क्या दौर था जब लिखकर सब बयां होता था,
छुपे प्यार भरे अपनेपन में ,सारा दिल का हाल बयां होता था|
रूठना मनाना एक लिफाफे के खर्च में छुपा होता था,
शब्दों में वो गहराई थी कि कलम को भी चलने में मज़ा लगता था |
प्रिय प्रियवर से हाल शुरू होता था,
दिल की गहराइयों में जज्बातो का तूफान दबा होता था |
पूछते थे जब हाले दिल एक दूसरे का तो
कशिश से दामन जुड़ा होता था ,
प्यार भरे खतों में महीनों का प्यार छुपा होता था|
बरबस ही आंखें बरस पड़ी जब पहले प्यार का खत मिला,

अब प्यार भी वहीं है जज्बात भी वहीं है
पर मेरा खत पुराने लिफाफे में कागजों के बीच कहीं फिर से छुप गया|

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