अपशकुनी

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अपशकुनी

By |2018-01-20T17:12:40+00:00January 9th, 2018|Categories: कहानी|Tags: , , |0 Comments

हमारे यहां गांव के अंदर एक परिवार में लड़की का जन्म हुआ। लड़की अत्यंत सुंदर थी जो भी लड़की को देखता वही कहता कि लड़की बहुत सुंदर है बच्ची के पिता का नाम हरिशंकर प्रसाद था और मां का नाम जानकी था, लड़की का नामकरण संस्कार हुआ और उसका नाम दीपिका रखा गया लड़की के एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थी।
कुछ दिनों के अंदर दीपिका की मां को बुखार आ जाने के कारण अचानक देंहात हो गया, दीपिका की दादी कहने लगीं ये तो अपशकुनी बच्ची घर में आ गई है। मां के मृत्यु के बाद पिता भी दीपिका से नफरत करने लगे थे। दादी दादा भी उसे नफरत से देखते थे बच्ची का कोमल मन नहीं जानता था कि सब उससे इतनी घृणा क्यों करते हैं। जबकि उसके भाई बहन को इतना प्यार मिलता है।
धीरे-धीरे बड़ी होने लगी, उसके साथ अपशकुनी घटनाएं बढ़ने लगी। चूल्हे पर रोटी बनते देख ले तो बनती हुई रोटी काली पड़ जाए उबलता दूध देख ले तो वह भी उसी समय फट जाए बच्चे के साथ खेलने लग जाए तो बच्चे के तीव्र बुखार आ जाए। अब तो यह हाल हो गया गांव में शोर मच गया। कोई उसे कर्मजली बोलता तो कोई उसे अपशकुनी बोलता अंदर ही अंदर बहुत कष्ट पाती थी दीपिका बहुत उदास रहने लगी। सभी उसे देखकर डरने लगे बच्चे भी देख उसे भाग जाते थे कुछ बुरा हो जाएगा इसके पास मत जाओ।
दीपिका दुनिया में अकेली थी। थोड़ी बड़ी हुई स्कूल जाने लगी, कोई उसके साथ न होता था। लेकिन एक शरीफ अध्यापक उसका बहुत ध्यान रखते थे, वह इन अंधविश्वास पर यकीन नहीं करते थे हमेशा उस बच्ची की सहायता करते थे पढ़ने लिखने में भी मदद करते थे।
दीपिका धीरे-धीरे जवान हो गई काले काले रेशमी बाल हिरनी जैसी आंखें चांदी सा चमकता रंग अद्भुत सुंदरता की मालकिन और किस्मत देखिए कर्मजली और अपशकुनी के नाम से प्रसिद्ध हो गई।
उसी गांव में एक परिवार रहता था। उनका बेटा डाक्टर था जो हरिद्वार में उनका क्लिनिक था वह वहीं रहता था उसका नाम मोहित था वह कुछ दिनो के लिए गांव आया दीपिका को देखकर उसकी सुंदरता में डूब गया। उसने दीपिका के साथ शादी करने का निश्चय किया। अपने माता-पिता से शादी करने के लिए लिए बोला मां ने समझाया बेटा ये अपशकुनी है इससे शादी मत कर पर मोहित इन बातों को कहां मानने वाला था माता-पिता से बोला ऐसा कुछ नहीं होता।
आखिरकार मोहित के पिता दीपिका के पिता के पास रिश्ता लेकर गए पिता इतना अच्छा रिश्ता आया देखकर फौरन तैयार हो गए, और सोचा चलो अपशकुनी अब घर से चली जाएगी, दीपिका की शादी मोहित के साथ हो गयी मोहित दीपिका को लेकर हरिद्वार आ गया। कुछ ही दिनों में मोहित के पिता की हृदयगति रूक जाने के कारण अचानक देंहात हो गया, मोहित की मां जोर जोर से रोने लगी और बेटे मोहित से कहने लगी बेटा मना किया था मत कर अपशकुनी से शादी पर तू नहीं माना।।
यह सब देखकर दीपिका मंदिर में जाकर फूट फूट कर रोने लगी। रोने की आवाज इतनी करूणामयी थी आसपास का वातावरण थरथरा गया आसपास ऐसा लगने लगा जैसे उसके साथ भगवान् भी रो रहे हैं। दीपिका भगवान् से कहने लगी अब नहीं जी सकती मेरे कारण दूसरों का अहित हो जाता है मैं गंगा में डूब कर मर जाऊंगी गंगा में डूबने जाने वाली थी कि उसके पति को आभास हो गया की दीपिका बहुत दुखी है वह भी मन्दिर पहुंच गया उसने दीपिका को समझाया कि कोई भी इंसान अपशकुनी नहीं होता परिस्थितियां तुम्हारे साथ ऐसी हो गई कुदरती ऐसा घटता चला गया और प्यार के साथ घर ले गया।।
मैं भी सोच रही हूँ क्या कोई अपशकुनी हो सकता है। दीपिका ने बचपन से ही इतना कष्ट क्यों पाया। कोई बता सकता है।।

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