तुलसीकृत रामायण के चयनित दोहों का भावार्थ मुक्त काव्य में.

गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। की चहिं मिलइ नीच जल संगा।।
साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहि राम देहि गनि गारी।। 6. 5

.

जब पवन गतिमान हो
तब वह सब कुछ
जो हवा के संपर्क में आता है
तो सामान्य परिस्थितियों में
वह ऊपर उठता है
क्योंकि वो आकाश में
बहुत ऊपर पहुंचता है
उदात्त बन, नभ में बहुत ऊंचे
चमकने के लिए. 01
.
इसमें धूल का
वह कण भी सम्मलित है
जिसे एक महत्वहीन तत्त्व माना जाता है
जिसकी कोई उपयोगिता नहीं होती
लेकिन जब यही कण आकाश तक पहुंचता है
पवन के संपर्क में ऊपर उठ
यह एक कीमती मणि की तरह दिखने लगता है
क्योंकि तब वह सूर्य की किरणों की मदद करता है
किरणों को अपने रंगों और छटाओं
और स्वर्गीय सुंदरता को फैलाने में
आकाश में और
धरती पर 02
.
वही धूल का कण
जिसका पृथ्वी पर
कोई महत्त्व वा मूल्य नहीं होता
वही इंद्रधनुष को और सुन्दर बनाने में
सहायता करता है
सात रंगों के महान उपहार के साथ
जो धरती पर दिखता है
बनाने हमारे
जीवन को अधिक रंगीन और सुखद
जिसे बहुत
पवित्र और अद्भुत माना जाता है
भगवान के एक
अनमोल उपहार की तरह 03
.
इसी तरह
जब एक गैर महत्वपूर्ण या साधारण सा मानव
धूल के एक कण की तरह
संपर्क में आता है
या किसी वास्तविक सत्संग में
किसी सच्चे अच्छे या महान व्यक्ति के या
किसी सच्चे संत या गुरु के*
तब वह इंसान भी परिवर्तित हो जाता है
धूल के कण की तरह
एक अनमोल रत्न में
भगवान के प्रकाश को प्रतिबिंबित करने के लिए
दुनिया को रोशनी से जगमगाने के लिए
प्रेम, सच्चाई, अहिंसा की रोशनी के साथ
प्राणिमात्र के लिए
दयालुता का सन्देश लिए. 04
.
लेकिन वही धूल का कण
जब पानी के संपर्क में आता है
पवन के स्थान पर
तब उसी कण का पतन होने लगता है
और वो नीचे जाने लगता है
एक गैर उपयोगी वास्तु में परिवर्तित हो कर
जिसे हम कीचड़ कह कर जानते हैं
संत तुलसीदासजी ने दो उदाहरण दिए
अच्छे और बुरे संपर्क के प्रभावों को
समझाने के लिए
और वह आगे दुसरे उदाहरण में कहते हैं
जैसेकि जब किसी तोते को मौका मिलता है
किसी अच्छे इंसान के साथ रहने का
एक संत या धार्मिक व्यक्ति के साथ
तो वह जल्द ही सीखता है और
रटने लगता है
सबसे पवित्र और हृदय के अन्तः तक को
पुलकित कर देने वाला ईश्वर का नाम
श्रीराम, राम राम,
और सभी का अभिवादन करता है
रामराम, रामराम
जय श्रीराम
कहकर. 05
.
लेकिन जब कोई तोता
एक बुरे व्यक्ति के संपर्क में
रहता है
या किसी दुष्ट व्यक्ति के साथ
तो वो बहुत कम समय में ही
सीख जाता है
हर एक को गाली देना
और आने वाले हर नए आगंतुक को
केवल गालियां ही देता है. 06
.
इन दृष्टांतों से
हम आसानी से समझ सकते हैं
एक अच्छे व्यक्ति के सत्संग के प्रभाव को
और एक खराब व्यक्ति के
साथ के प्रभाव को
हमारे जीवन पर
इन दो सुन्दर उदाहरणों के द्वारा। 07
* आज की दुनिया में अच्छा और सच्चा सत्संग या गुरु मिलना आसान नहीं बहुत कठिन है.

Ravindra K Kapoor

 

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Ravindra K

कवि, लेखक, गीतकार, हिंदी और अंग्रेजी। पहले केवल अंग्रेजी में ही लिख रहा था अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखता हूँ और फेस बुक पर मेरे पेज Ramcharitmanas Dohas in English Hindi & Nepali में तुलसीकृत रामायण के चयनित दोहों का भावार्थ मुक्त काव्य के द्वारा पिछले एक दो वर्षों से कर रहा हूँ और अब तक लगभग साठ दोहों का भावार्थ हो चुका है जिसे विश्व के लगभग २० देशों में पढ़ा जाता है.

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