भारत वीर

: नये साल का वो सुबह सवेरा
नई उमंग नए जोश में मन मेरा ।
मैं भी बहुत खुश था सुबह-सुबह
सुन ‘हैप्पी न्यू ईयर’ का स्वर सब जगह।।

सोचा नए दिन की नयी शुरुआत में,
नई खबर नए ऑफर होंगे,
सो जल्दी अखबार के पन्ने पलटे होंगे,
मैंने भी और शायद आपने ।

प्रथम पृष्ठ विज्ञापन से रंगीन था ,
पृष्ठ खबर का दूजा जरा संगीन था ।
क्योंकि वह आज काली स्याही से नहीं ,
देश सैनिकों के खून से रंगीन था ।
सिर ऊंचा नहीं आज धरा जमीन था ।।

खबर ज्योही मैंने पढ़ी मन निश्चल था,
शहीद सैनिकों के होने से तन अचल था।
गोली की भेंट चढ़ा किसी मां का आंचल था,
श्वेत हिम हिमालय का रक्त रंजित अंचल था ।।

मौन एकलव्य भेंट चढ़, सिरमौर अर्जुन बनाए गुरु द्रोण था।
मां की कोख में , पल रहा निर्दोष नवजात भ्रूण था। किसी मां का लाल क्षत-विक्षत, पर देश का प्राण था ।
जनता पर करके कुराजनीति निः सोच नेतागण था ।।

कब तक जलेगा वीरांगनाओं का अस्तित्व
कब तक खून की होली खेलेगा मातृत्व।
कब तक सोएगा यह देश का कुटिल नेतृत्व,
कब तक समझेगा एक वीर सपूत का महत्व।।

: नहीं चाहिए वह रक्त रंजित काश्मीर ,
हमें चाहिए वह क़ायनात पाक कश्मीर।
नहीं चाहिए वह बिका हुआ ज़मीर,
हमें चाहिए खुशहाल भारत  वीर।।

जय हिंद जय भारत

**स्वरचित**

के.आर. चौधरी
उ.प.रेलवे

जोधपुर

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